भजन संहिता 4
1 हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूँ तब तू मुझे उत्तर दे;
2 हे मनुष्यों, कब तक मेरी महिमा का अनादर होता रहेगा?
3 यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है;
4 काँपते रहो और पाप मत करो;
5 धर्म के बलिदान चढ़ाओ,
6 बहुत से हैं जो कहते हैं, “कौन हमको कुछ भलाई दिखाएगा?”
7 तूने मेरे मन में उससे कहीं अधिक आनन्द भर दिया है,
8 मैं शान्ति से लेट जाऊँगा और सो जाऊँगा;
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