भजन संहिता 14
1 मूर्ख ने अपने मन में कहा है, “कोई परमेश्वर है ही नहीं।”
2 यहोवा ने स्वर्ग में से मनुष्यों पर दृष्टि की है
3 वे सब के सब भटक गए, वे सब भ्रष्ट हो गए;
4 क्या किसी अनर्थकारी को कुछ भी ज्ञान नहीं रहता,
5 वहाँ उन पर भय छा गया,
6 तुम तो दीन की युक्ति की हँसी उड़ाते हो
7 भला हो कि इस्राएल का उद्धार सिय्योन से प्रगट होता!
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