भजन संहिता 129
1 इस्राएल अब यह कहे,
2 मेरे बचपन से वे मुझ को बार-बार क्लेश देते तो आए हैं,
3 हलवाहों ने मेरी पीठ के ऊपर हल चलाया,
4 यहोवा धर्मी है;
5 जितने सिय्योन से बैर रखते हैं,
6 वे छत पर की घास के समान हों,
7 जिससे कोई लवनेवाला अपनी मुट्ठी नहीं भरता,
8 और न आने-जाने वाले यह कहते हैं,
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